Friday, July 5, 2013

बस दो पंक्तियाँ--- "जब भी मेरी उनसे निगाहें मिलती है

बस दो पंक्तियाँ---

"जब भी मेरी उनसे निगाहें मिलती है
सच मानिये मेरी तबीयत बदलती है

ना जाने नशा कैसा दिल में उतरता है
आँखों के सामने मेरे हर रात मरती है।" 

-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 5th July 2013 at Patna)