बस दो पंक्तियाँ---
"जब भी मेरी उनसे निगाहें मिलती है
सच मानिये मेरी तबीयत बदलती है
ना जाने नशा कैसा दिल में उतरता है
आँखों के सामने मेरे हर रात मरती है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 5th July 2013 at Patna)
"जब भी मेरी उनसे निगाहें मिलती है
सच मानिये मेरी तबीयत बदलती है
ना जाने नशा कैसा दिल में उतरता है
आँखों के सामने मेरे हर रात मरती है।"
-शशिष कुमार तिवारी
(8.29pm, 5th July 2013 at Patna)